Monday, June 29, 2015

मीठे बाबा को मीठी मीठी याद प्यार

��मीठे बाबा को मीठी मीठी याद प्यार��

मेरे प्यारे प्यारे और इस राजदुलारे के मीठे मीठे बापदादा अगर आपको कुछ लिखना चाहू तो भी क्या लिखू कैसे लिखू कहा से सुरु करू क्योकि मेरा ये पवित्रता से भरा ब्राह्मण जीवन सिर्फ चंद लब्ज़ में ही बयान हो जाएगा

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"तुम्ही से सुरु और तुम्ही पे खत्म"।
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बस आपको एक ही बात कहना चाहूँगा के....
आज तुमसे ये ब्राह्मण जन्म पाकर कहाँ से कहाँ और किस रूहानी ऊंचाई पे आगया।
अगर में आपका ब्राह्मण बच्चा न बनकर सिर्फ लौकिक में होता तो आज क्या और कहाँ होता ये सोच कर ही तन मन में कंपन सा छा जाता है।

शुक्रिया मेरे लौकिक जीवन को संगमयुग का हिरे तुल्य अलौकिक जीवन बनाकर ख़ुशी के जुले में जुलते सतयुग की बादशाही के सच्चे अर्थ में काबिल बनाने का।

कोई 1-2नही पर इस संगम युग की हर रूहानी प्राप्ति के लिए पदम् गुणा
������शुक्रिया������

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