पांच स्वरूपों का अभ्यास करना व फरिश्ता से देवता का पांच बार अभ्यास करना।
मेरे ऊपर एक ओर है ब्रह्मा माँ- मुझे शीतलता की किरणे दे रही है। फिर दूसरी ओर ऊपर है ज्ञान सूर्य शिव बाबा वे मुझे शक्तियों की किरणे दे रहे है। क्रमशः बार बार इसका अभ्यास करना।
इस विशव को वैसे ही साक्षी होकर देखें जैसे बाबा देखता है, यह सृष्टि चक्र पूरा हो रहा है अब मुझ आत्मा को वापस घर जाना है।
दिन में पांच बार सभी को आत्मिक दृष्टी से देखना।
निराकारी स्थिति का अभ्यास इस तरह करना- मेरा शरीर छूट गया, लोप हो गया और रह गई मैं चमकती हुई अति तेजस्वी आत्मा।
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