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✨अव्यक्त स्तिथि का अनुभव करना है तो एक शब्द याद रखो....
.स्वयं को मेहमान समझो।
✨मनसा,वाचा,कर्मणा~तीनो ही व्यक्त में होते अव्यक्त रहें इसके लिए हर कर्म करते अपने को मेहमान समझो।अगर मेहमान समझेंगे तो फिर जो अंतिम सम्पूर्ण स्तिथि का वर्णन है वह इस मेहमान बनने से ही होगी।
अपने को मेहमान समझेंगे तो फिर व्यक्त में होते हुए भी अव्यक्त में रहेंगे।मेहमान का किस के साथ भी लगाव नही होता है।हम इस शरीर में भी मेहमान हैं,इस पुरानी दुनिया में भी मेहमान हैं।जब शरीर में ही मेहमान हैं तो शरीर से भी क्या लगाव रखें।सिर्फ थोड़े समय के लिए यह शरीर काम में लाना है ।
जितना यहाँ मेहमान बनेंगे उतना ही फिर वहाँ विश्व का मालिक बनेंगे।इस दुनिया के मालिक नही हैं,इस दुनिया में मेहमान हैं।नई दुनिया के मालिक हैं।यह जो व्यक्त भाव में आ जाते हैं,उसका कारण यही है~अपने को मेहमान नही समझते हैं।वस्तुओं पर भी अपना अधिकार समझते हैं।इसलिए उनमे attachment हो जाती है।अपने को अगर मेहमान समझो तो फिर सभी बातें खत्म हो जाएँ।
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