Tuesday, July 21, 2015

प्रेम सागर परम पिता......

प्रेम सागर परम पिता परमात्मा से घनिष्ट सम्बन्ध बनाता है सहनशील

����नदी, हवा, धरती कभी नही कहती कि हम कब तक इस तमोप्रधान मनुष्य की सेवा करें???सूर्य कभी नही कहता कि मुझे कब तक रोशनी देनी होगी??फूल कभी नही कहता कि मुझे कब तक सुगन्ध देनी होगी??लेकिन हम छोटी छोटी बातो पर ही झट कहने लगते हैं कि आखिर मुझे कब तक सहना पड़ेगा,पीड़ित होना पड़ेगा???

����कई ब्राह्मण बच्चे भी बात बात में कहते हैं कि हम बहुत सहन करते हैं, मरते हैं इतना तो शायद कोई कर नही सकता ।वे यह भूल जाते हैं कि प्यारे ब्रह्मा बाबा ने शिव बाबा का बनने के बाद जितना सहन किया उसका वर्णन स्वयं भगवान भी करते हैं । स्वयं से यह सवाल पूछें कि क्या हम ब्रह्मा बाबा जितना सहन कर सकते हैं??

����यह हमारा अभिमान है, जो बोलता है कि हम बहुत सहनशील है ।क्योकि सहनशील आत्मा सहन तो करती है लेकिन मुख से कभी उसका वर्णन नही करती, ना किसी को पता लग पाता है । वह हर पीड़ा को सूली से काँटा बना लेती है ।फिर भी अपने प्रेम की शक्ति से सदैव हर्षितमुख नजर आती है ।

��✨सदा याद रखें कि हमारा सम्बन्ध तो प्रेम के सागर परम् पिता परमात्मा से है, इसलिए हमे भी मास्टर प्रेम का सागर बन सबसे प्रेम करना है और मुख से कभी भी यह नही कहना कि आखिर कब तक पीड़ा को सहे???

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