सदा साक्षी स्थिति में स्थित होकर पार्ट बजाओ तो कभी भी किसी पार्ट में चलायमान नहीं होंगे लेकिन न्यारे और प्यारे रहेंगे । अच्छे में अच्छा , बुरे में बुरा ऐसा नहीं होगा । साक्षी अर्थात् सदा हर कार्य करते हुए कल्याणकारी वृत्ति में रहने वाले । जो कुछ हो रहा है उसमें कल्याण भरा हुआ है ।
अगर माया का विघ्न भी आता तोउसमें भी लाभ उठाकर, शिक्षा लेकर आगे बढ़ेंगे , रूकेंगे नहीं । ऐसी साक्षीपन की सीट है जिस पर बैठकर ड्रामा को देखो तो बहुत मज़ा आयेगा । वाह ड्रामा वाह ! का गीत गाते रहेंगे । अगर कोई बीमार भी है , बिस्तर पर भी है तो भी सेवा कर सकते हैं । भले शरीर ठीक नहीं है लेकिन बुद्धि तो ठीक है न ?? मनसा सेवा बुद्धि द्वारा ही ठीक होती है । ऐसी लगन वा उमंग-उत्साह रख सेवा करेंगे तो ये प्रकृति भी आपकी जन्म-जन्म सेवा करती रहेगी । प्रकृति भी दासी बन जायेगी ।
संकल्प की तीली लगाने से बिंदी से साँप हो जाता है ।
बिंदी लगाना आता है वा बिंदी पर क्वेश्चन आ जाता है ? आजकल की दुनिया में बारूद चलाते हैं जो इतनी छोटी बिंदी से इतना बड़ा साँप बन जाता है । यहाँ भी लगानी चाहिए बिंदी । बिंदी मे सब समा जाता है । अगर संकल्प की तीली लगा देते तो फिर वह साँप हो जाता । न तीली लगाओ न साँप बनो । बापदादा यह बच्चों का खेल देखता रहता है । जो होता है , सब में कल्याण भरा हुआ है । ऐसा क्यों वा क्या ? नहीं । जो कुछ अनुभव करना वह किया । परिवर्तन किया और आगे बढ़ो । यह है बिंदी लगाना ।
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