✺✺✺✺✺✺ अहंकार ✺✺✺✺✺✺
कुछ लोग प्रेम नामक भाव के साथ कोई सम्बन्ध नहीं रखना चाहते। क्योंकि उन्हें सब तरफ से धोखा मिला है , अतः उन्होंने प्यार को तिलाँजलि दे दी है। वे समझते हैं कि यह बहुत जटिल, थका देने वाला है। वे कहते हैं, "मैं अब किसी के प्यार नहीं करने वाला और न ही मैं चाहता हु कोई मुझे प्यार करे।" वे प्यार के विषय में बात भी नहीं करना चाहते।" वे मातृ-प्रेम , मित्र-प्रेम या अन्य किसी प्रकार के प्रेम के विषय में सुनना ही नहीं चाहते।
ये ऐसे व्यक्ति हैं जो अंत में कह देते हैं, "मैं तो बस आजाद रहना चाहता हुँ।" वे सोचते हैं कि प्यार का अर्थ होना चाहिए इन चीजों से आजादी। वास्तव में यह एक प्रकार का अहंकार है। ऐसे लोग यह नहीं समजते कि यह संसार एक कर्मभूमि है और इस कर्मक्षेत्र को तथा हमारे जीवन को प्रेम रूपी जल की आवश्यकता है।
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