मुरली में आने वाली कहावते
राम राजा,राम प्रजा,राम साहूकार है। बसे नगरी जिये दाता धर्म का उपकार है।
राम के राज्य में प्रजा भी साहूकार होती है तथा सभी में दातापन के संस्कार होने के कारण धर्म का सदा उपकार होता है। इस सन्दर्भ में बाबा यह स्पष्ट करते है की भक्ति में एक तरफ रामराज्य की महिमा करते है और दूसरी तरफ कहते है की राम की सीता चुराई गयी। रामराज्य जो एक सुख,शांति संपन्न राज्य है उसमे राम और रावण (राक्षस) की लड़ाई दिखाई गयी है, जो असंभव है। वास्तव में दिलाराम बाप सिर्फ एक शिवबाबा है जो की अभी रामराज्य स्थापन कर रहे है।
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