Monday, December 1, 2014

समस्याएं वा निवारण

����������������������������
��अमृत वेले का महत्व��

समस्याएं वा निवारण

अगर ब्राह्मण जीवन की बनी हुई दिनचर्या प्रमाण कोई भी कर्म यथार्थ वा निरंतर नही करते तो उसके अंतर के कारण पूजा में भी अंतर पड़ेगा।

मानो कोई अमृत्वेले उठने की दिनचर्या में विधि पूर्वक नही चलते तो पूजा में भी उनके पुजारी उस विधि में नीचे ऊपर करते अर्थात पुजारी भी समय पर उठ कर पूजा नही करेगा। जब आया तब कर लेगा

�� अगर अमृत वेले जाग्रित स्तिथि में अनुभव नही करते।मज़बूरी से वा कभी सुस्ती कभी चुस्ती के रूप में बैठते तो पुजारी भी मजबूरी से वा सुस्ती से पूजा करेंगे। विधिपूर्वक पूजा नही करेंगे।

�� ऐसे हर दिनचर्या के कर्म का प्रभाव पूजनीय बनने में पड़ता है। विधिपूर्वक ना चलना वा कोई भी दिनचर्या में ऊपर नीचे होना यह भी अपवित्रता के अंश में गिनती होता है।
����������������������������

No comments:

Post a Comment