वाह ड्रामा वाह
ड्रामा न्यायकारी,कल्याणकारी वा एक्यूरेट है।
शान से परे होते हो तो परेशान होते हो।बात बदल जाए लेकिन आप ना बदलो यह है निश्चय।कभी माया से परे-शान तो नही होते हो??कभी वातावरण से,कभी ब्राह्मणों से परेशान होते हो। अगर अपनी शान से परे होते हो तो परेशान होते हो। तो शान की सीट पर रहो। साक्षी पन की सीट शान की सीट है। इससे परे ना हो तो परेशानी खत्म हो जाएगी।
प्रतिज्ञा करो कि कभी भी कोई भी बात में ना परेशान होंगे ना करेंगे। जब knowledgefull बाप के बच्चे बन गए,त्रिकालदर्शी बन गए तो परेशान कैसे हो सकते???संकल्प में भी परेशानी ना हो। क्यों शब्द को समाप्त करो।क्यों शब्द के पीछे बड़ी queue है।
मेला देख कर ख़ुशी होती है ना???यह भी ड्रामा में जो कुछ होता है वह अच्छे ते अच्छा होता है।
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