Monday, December 1, 2014

कर्म और विभिन्न योनियाँ, क्या है वास्तविकता????

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��कर्म और विभिन्न योनियाँ, क्या है वास्तविकता????
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��दुनिया में और विशेष भारत में यह मान्यता है कि मनुष्य आत्मा अपने बुरे कर्मो का फल भोगने के  लिए पशु,
पक्षीयो,कीड़े,मकौडो,कीटपतँगों जैसी विभिन्न 84 लाख योनियों में भटकती हैं।परन्तु अभी ज्ञान सागर परम पिता परमात्मा बाप ने हमको यथार्थ ज्ञान दिया है और वास्तविकता से परिचित करवाया है कि ऐसा नही है।

��हर योनि की आत्मा अपनी योनि के अनुसार कर्म करती है और उस योनि के अनुसार ही उसे उसके कर्मो का फल मिलता है।यह सृष्टि कर्म क्षेत्र है ।यहां पर आत्माएं कर्म करने और उसका फल भोगने का पार्ट बजाने ही आती हैं।यह मनुष्यों की भूल अथवा भ्रम है कि मनुष्य आत्मा अपने बुरे कर्मो का फल  भोगने के लिए भिन्न-भिन्न  निम्न कोटि की  योनियों में जन्म लेती है।

��मनुष्य की आत्मा मनुष्य योनि में ही जन्म ले कर अपने कर्मो का अच्छा या बुरा फल भोगती है।इसको कयामत का समय कहा जाता है ।सभी का यह हिसाब-किताब चुक्तू होना है।जानवरो का भी हिसाब किताब चुक्तू होता है ना।कोई कोई राजाओं के पास रहते हैं।कितनी उनकी संभाल होती है।

��यह भी ड्रामा में नूँध है।समझते है मानव जन्म अति दुर्लभ है।84 लाख योनियो के बाद ही एक सुख का जन्म मिलता है।परन्तु ऐसा होता तो सभी मनुष्य सुखी होने चाहियें।

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