Tuesday, December 2, 2014

दीपराज बाबा ने मनाई दीपावाली

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          ♻बाबा पोयम्स♻

दीपराज बाबा ने मनाई दीपावाली

चैतन्य दीपकों से अपनी सभा सजाई

हर आत्मा की जागती ज्योत हुई उजयारी

प्रकाश से विश्व को मिली खुशहाली

आत्मा दीपकों से दिवाली की यादगार मानाई

दिव्य स्वरुप से हर आत्मा चमकाई

सादहरण रूप नही दिया फिर दिखाई

प्रज्वलित हुआ हर दीप फिर आत्मा जगमगाई

वाह वाह चैतन्य दीपक के गीत गुनगुनाओ

दीपराज संग अपनी दीपावली मनाओ

खुशियों के इन पलो को दिल में बसाओ

अपने दीपक की ज्योति से हर दीप जगाओ

इस ज्वाला से विश्व का नया रूप दिखाओ

बापदादा की दी मुबारकों से मुस्कराओ

वाह बाबा वाह.. वाह दीपराज के दीपकों अपनी ही यादगार को दिल से मानाओ।।

ॐ शांति !!!

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याद की यात्रा का करो तुम स्नान

उससे ही होगा आत्मा का कल्याण

जन्म जन्मान्तर के होंगे सब पाप भस्म

आत्मा बन जायेगी फिर सत्तोप्रधान

ज्ञान है पढ़ाई करनी इससे सच्ची कमाई

होती नही इससे पापों की भरपाई

ज्ञान है सहज याद में होती मेहनत

याद से ही बनते पुण्य आत्मा

याद के बल से ही ज्ञान का तीर लगता

आत्मा का बुझता हुआ दीपक फिर जलता

बुद्धि स्वच्छ हो करती अच्छी धारणा

निरंतर याद हो तो बन जाये कर्मातीत

मुश्किल से 5 मिनट कोई की याद ठहरती

माया के विघ्न से बुद्धि फिर भटकती

चढ़ती कला से उतरती कला हो जाती

देह-भान से बुद्धि फिर मलीन हो जाती

अहंकार में लाकर माया नीचे जोड़ पटकती

आत्मभिमानी होने का अभ्यास करना

देह को भूल सिर्फ एक बाप को याद करना

मन्मनाभव के मन्त्र से सुरजीत हो जाना

अचल अडोल हो अंगद जैसा बनना

संगठन में सहयोग की अंगुली देना

नये ज्ञान से नयी दुनिया को लाना

पावन बन याद से पावन देवता बनना

याद के जोहर से ज्ञान की पराकाष्ठा पाना

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