Tuesday, July 21, 2015

अष्ट रत्न......

अष्ट रत्न बनने वाली आत्माओं की 8 विशेषताएं✏✏

�� अष्ट रत्न आत्मा ज्वालामुखी योग के द्वारा इस संसार से पूर्ण रूप से न्यारे होकर अपनी आत्मा को सम्पूर्ण पवित्रता की स्थिति में स्थित रखती है.

�� अष्ट रत्न आत्मा श्रीमत को साधारण रूप से पालन नहीं करती है. अपनी मन बुद्धि को पूर्ण रूप से बाबा के आगे अर्पित करती है. जो बाबा के मन में है वही उनके मन में होता है और जो बाबा की बुद्धि में है वही उनकी बुद्धि में होता है.

�� अष्ट रत्न अपनी पहचान देह की पहचान से नहीं देते है. वे सम्पूर्ण निरहंकारी होंगे और किसी भी रूप में धोखेबाज नहीं होंगे. वे अपना पार्ट ऐसे बजायेंगे जैसे कि उन्होंने ये शरीर एक पौशाक के रूप में पहना है. दुःख तो उनके लिए पराया शब्द होता है. वे पूर्ण निष्ठावान और मर्यादित होंगे.

��अष्ट रत्न का सूक्ष्म रूप से अटूट व मजबूत सम्बन्ध बाबा के साथ रहेगा और उसका ईश्वरीय परिवार के प्रति पूर्ण समर्पण भाव होगा.

�� अष्ट रत्न निस्वार्थ करुणा का रूप होंगे, हर प्रकार से निरंतर सेवाधारी होंगे. उनके हर व्यवहार में मनसा सेवा झ लकेगी.

��अष्ट रत्न सच्चाई के लिए प्रतिबद्ध होंगे और श्रेष्ठ कर्म के लिए किसी प्रकार का कोई समझौता नहीं करेंगे.

�� अष्ट रत्न सदा बाबा को अपने सामने रखेंगे और स्मृति में रखेंगे कि बाबा से मिले स्नेह को ही वे रिटर्न में दे रहे हैं.

�� अष्ट रत्न सदा अपना समय और स्वांस प्यार और ख़ुशी से ईश्वरीय सेवा में अर्पित करेंगे!!!

                 ॐ शांति
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