Wednesday, July 1, 2015

नियति/भाग्य का अर्थ

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��सृष्टि चक्र में जो हुआ था,जो हो रहा है और होगा वह पूर्व नियोजित है। यह ड्रामा बना बनाया है। यह हू-ब-हू 5000 वर्ष में repeat होता रहता है। इसके परिवर्तन में व्यक्ति स्वतंत्र नही है। विश्व की विशाल पृष्ठ भूमि पर
जड़ और चेतन के सयोंग से जो घटना अतीत में घटी है,वर्तमान में घट रही है और भविष्य में घटेगी वह सब पूर्व नियोजित है। इसमें रत्ती भर भी फेर बदल की गुंजाईश नही है।

��ड्रामा का यह राज त्रैकालिक सत्य है। जो होना था वही हुआ,वही हो रहा है और वही होगा। अनादि ड्रामा निरंतर चल रहा है।ज्ञान के अभाव में व्यक्ति यही कहता है यह मैंने किया,यह मेरा परिवार है,इसे मैंने बनाया। ऐसे ही ना जाने कितने व्यर्थ के दायित्वो का झूठा अहम अपने उपर लादे रहता है। समय की गति बड़ी धीमी और निमर्ल है लेकिन पूर्व निर्धारित ड्रामा की प्रक्रिया में ही सबको चलना है।

��नियति से अलग कुछ भी नही है। भाव और संकल्प के रूप में जो vibrations  उत्पन्न होते हैं वे भी पूर्व नियत हैं।स्थूल नेत्रों से देखने पर ऐसा लगता है कि दुःख-सुख,हानि-लाभ आदि घटना या परिस्तिथि के प्रभाव से हो रहें हैं लेकिन ज्ञान के दिव्य नेत्र से देखने पर व्यक्ति यह अनुभव करता है कि सब कुछ पूर्व नियोजित है।

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