Saturday, December 13, 2014

आत्मा की बैटरी को भरपूर करो......

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             ��मुरली पोयम्स��
                   13/12/14

आत्मा की बैटरी को भरपूर करो

ज्ञान-योग से सतोप्रधान बनो

रावण का कोई घर नही, तभी भटकाता

रावण को बाबा नही कहना

बाप तो हमें ठिकाना देते

भटकना छुड़ा घर ले जाते

हम आत्मा भाई -भाई है, निश्चय रखना

अज्ञान नींद से सबको जगाना

शांतिधाम सुखधाम का रास्ता बताना

मन -बुद्धि को सेकण्ड में एकाग्र करना सीखना

कंट्रोलिंग पॉवर हो तब सर्वशक्ति संपन्न बनते

पवित्रता का ताज हो

विश्वकलयांकारी की जिम्मेवारी हो

तब ही डबल ताजधारी बनते

ॐ शांति !!!

मेरा बाबा !!!

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            ��बाबा पोयम्स��

~~~~हाज़िर हुज़ूर~~~~

मेरा बाबा हाज़िर हुज़ूर है

मुझे सब उसका मंजूर है

दुनिया कहते जहा देखूँ तू ही तू है

मेरे दिल में वो चश्मेबदुर है

मन में एक सिर्फ तू ही तू है

होता मुझे बहुत गुरुर है

कभी न रहू तुम्से अब दूर मैं

सम्बन्ध मेरे उनसे अटूट है

जीवन मेरा भी अब खूब है

पाया मैंने नया सुरूर है

मेरा साजन वो हो रहा मशहूर है

बन गया अविनाशी सिंदूर है

गम ले ख़ुशी दे करता भरपूर है

उस से मोहब्बत करने का मुझे गुरुर है

वो तो मेरे दिल में, जिगर में हाज़िर है

हर पल होता महसूस है

वो तो हाज़िर हज़ूर है

मेरे दिल का सुकून है

घर उसका बहुत दूर है

लेकिन1सेकंड में हाज़िर हज़ूर है

ओमशांति !!!

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राम राजा,राम प्रजा,राम साहूकार है।

मुरली में आने वाली कहावते

राम राजा,राम प्रजा,राम साहूकार है। बसे नगरी जिये दाता धर्म का उपकार है।

राम के राज्य में प्रजा भी साहूकार होती है तथा सभी में दातापन के संस्कार होने के कारण धर्म का सदा उपकार होता है। इस सन्दर्भ में बाबा यह स्पष्ट करते है की भक्ति में एक तरफ रामराज्य की महिमा करते है और दूसरी तरफ कहते है की राम की सीता चुराई गयी। रामराज्य जो एक सुख,शांति संपन्न राज्य है उसमे राम और रावण (राक्षस) की लड़ाई दिखाई गयी है, जो असंभव है। वास्तव में दिलाराम बाप सिर्फ एक शिवबाबा है जो की अभी रामराज्य स्थापन कर रहे है।

अगर कोई शक्तिशाली......

⛅��⛅��⛅��⛅��⛅��

�� आज का पुरुषार्थ - सूरज भाई जी ��

�� मेरा और भगवान का साथ�� पार्ट-2

अगर कोई शक्तिशाली �� व्यक्ति भी हमारे साथ �� रहता है तो हम कैसे निर्भय �� रहते है,निश्चिंत रहते है।

बाबा हमारे ✨ साथ है,इस सत्य को स्वीकार कर �� ले।बाबा ने बहुत बार �� कहा है

✋"में तुम्हारे साथ रहता हु,जुडा रहता हु"।✋

हसी �� में बाबा ने कहा,बहुत अच्छी�� सिख दी,की बच्चे तो बच्चे तो ✌ बाप से भी शक्तिशाली है,बाप कहते है �� में तुम्हारे साथ हु,और बच्चे बाप �� को अलग कर देते है।हसी �� की बात है लेकिन रहस्यमय �� बात है।

यह सत्य ✅ है की बाबा हमारे साथ ✨ रहता है केवल हम इसको याद �� रखेंगे।

परन्तु हमको �� यह जान लेना चाहिए की बाबा किस ❤ दिल में बेठेगा?❓

⛅��⛅��⛅��⛅��⛅��

बाबा को गुड मॉर्निंग कहते हुए.......

ॐ शांति

मनन चिंतन-

बाबा को गुड मॉर्निंग कहते हुए अपने ब्राह्मण जीवन का विशेष अनुभव:

बाबा मेरे खुदा दोस्त हैं। वह बिल्कुल दोस्तों जैसा प्यार और अपना पन अनुभव कराते हैं।

कभी तो वे आकर मेरा तकिया हिलाते है, कभी रजाई खींचते हैं। फिर में उन्हें मुस्कुरा कर धन्यवाद देता हूँ।

बाबा की याद में बैठता हूँ, और बाबा का आह्वान करता हु की, आकर अब मुझमे शक्तियाँ भरो।

सारे दिन के कर्म में बाबा मेरा पूरा साथ निभाते हैं। जब प्यार चाहिए, प्यार देते हैं। जब हिम्मत चाहिए, हिम्मत देते हैं।

बाबा की सुबह का डोज ही मेरे लिए पावरफुल होता है। खुदा दोस्त के बाद अब ओर कोई नही चाहिये। वहीँ मेरी जिंदगी को निखार रहे है व आगे बढ़ा रहे है।

Thank U खुदा दोस्त

मुरली का मेरे ब्राह्मण जीवन मे......


       आज का मनन चिंतन

मुरली का मेरे ब्राह्मण जीवन में महत्व

मुरली मेरे बाबा की मीठी वाणी है।

मुरली ज्ञान का अथाह भण्डार है।

मुरली आत्मिक स्मृतिमें रहने का साधन है।

मरली  बाबा से जुड़ने का सरल तरीका है।

इसमें मन को वश करने का जादू है।

मन-बुद्धि की खुराक है ।

इस से ज्ञान रत्नों की प्राप्ति होती है।

यह अविनाशी खजाना है।ये कमाई का साधन है ।

बाबा की श्रीमत है।

इस से मैं विश्व महाराजन बनूँगा।

मुरली की गहराई में जाने से अनेक रहस्य उजागर होते है।

मुरली  के ज्ञान रूपी भोजन को खाने  के बाद डाइजेस्ट करने के लिए मनन चिंतन करने में आनंद की अनुभूति होती।

इसके द्वारा अवचेतन मन में छुपी हमारी शक्तियां इमर्ज होने लगती हैं।

इस के ज्ञान को समझने से हम हर परिस्तिथि का सामना करने के लिए तैयार हो जाते है।

मुरली में दिए स्वमानों को अंदर समाने से confidence बढ़ता है और वरदानों से भरपूर होते है।

मुरली हमारे लिए छेनी हथौड़ों का काम करती है ।जिस से हम पूजन योग्य बनते हैं।

मुरली के ज्ञान से अस्त्र शस्त्र प्राप्त होते हैं।

मुरली मेरे बाबा प्रेम भरा पत्र है।

पिता की कल्याणकारी समझानी है।

टीचर की शिक्षा ,गुरु का वरदान है । मित्र की रमणीक बातें हैं।

मुरली मेरा जीवन है।

  मुरली सुप्रीम सर्जन द्वारा दी गई टॉनिक है।

मुरली हम आत्माओ को रिफ्रेश करती है।

संजीवनी बूटी है।

मुरली अन्धो के लिए आइना है।

अंधकार से प्रकाश में ले जाती है।

कर्म अकर्म विकर्म सुकर्म क

सच्चे अलोकिक परिवार से मिलाती हैं।

        
         ॐ शान्ति

फ़रिश्ता

��✨��✨����✨��✨��
         ��भोर का सुर��
           ��फ़रिश्ता��
फ़रिश्ता संकल्प और कर्मा से मुक्त रहता है संकल्प शक्ति से करता है क्योंकि संकल्प किसी न किसी कारन से ही आत्मा से उत्पन्न होते हैं और फ़रिश्ता निवारण स्वरुप होता है
       ♻♻♻♻♻
फ़रिश्ता स्वभाव संस्कार से भी मुक्त नेचुरल स्वाभाव वाला अर्थात अपने मूल स्वभाव गुण स्वरुप और शक्ति स्वरुप में स्थित रहता है
अपने को मर्यादित रखने के लिए शक्ति स्वरुप और दूसरों को मर्यादित रखने के लिए गुण स्वरुप ।
         ♻♻♻♻
संकल्प और संस्कार की देह से मुक्त होता है
         ♻♻♻♻
फ़रिश्ता अर्थात सर्वत्माओं की आकर्षण से मुक्त अपने विश्व सेवा के कार्य में ,विश्व कल्याण के कार्य में ,अपने धर्म स्थापना के कार्य में ,विश्व की पालना के कार्य में ,विश्व परिवर्तन के कार्य में अपनी लाइट और मिघ्त परिवर्तन के कार्य में व्यस्त रहता है
         ♻♻♻♻
फ़रिश्ते का निर्माण कार्य विश्व को  संपन्न बनाने का कार्य निरंतर चलते रहता है
         ♻♻♻♻
        ��ओम शान्ति��
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इश्वरीय मत पर चल पुरुषार्थ करो

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           ��मुरली पोयम्स��
                 12/12/14
इश्वरीय मत पर चल पुरुषार्थ करो

माया से हार नही खाओ

ईश्वरीय मत से उंच पद मिलती

दैवी मत सुखी बनाती

मनुष्य मत दुखी करती

माया के भूतों से स्वयं को बचाना

सर्विस कर राजतिलक लेना

पढ़ाई पर पूरा ध्यान देना

अविनाशी ज्ञान धन से धनवान बनना

पाप -आत्माओं से लेन -देन नही करना

सदा ख़ुशी की खुराक खाते रहना

ख़ुशी बांटो, बेफिक्र बादशाह हो

दिल से निकले - वाह खुशनशीब आत्मा

संगम पर जो स्वराज्यधिकारी

वही बनते फिर विश्वराज्यधिकारी

ॐ शांति !!!

मेरा बाबा !!!

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Tuesday, December 2, 2014

MURLI QUIZ - 29/05/70

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     ����MURLI QUIZ - 29/05/70����

     ▪TOTAL MARKS - 80▪

             MADHUBAN

Fill in the blanks.......*(60 marks)

 First number lene k liye vishesh _____ rakhna padta hai.

 Samip ratn ki samip aane ki nishani yahi hogi. Sadaiv apna aakari rup aur _____  ____ samne dekhte rahenge.

 ________ usko kaha jata hai jo sadaiv maya par vijay prapt kare.

 Sankalp sahit sab will ho jaye.  Sharir ka bhan  chhodna aur _____ tab bilkul will karna - yah hai ______.

 Jaise koi sharir chhodne wale hote hain to kayi logon ko maalum padta hai.  Aap bhi anubhav karenge ki yah _______ jaise ki _____ hai.

 Sarvshaktivan Baap k bachche jo shaktivan hain, unhon k aage maya bhi dur se salam kar _____ le leti hai.

 Knowledge k aadhar par _____ hatakar sadaiv magan avastha rahe . Agar vighn hatate nahi hain to jarur _____  _____ karne mein kami hai

Jiska sankalp bhi bigar farmaan k nahi chalta. Aise farmanbardar ko hi _____  ______ kaha jata hai.

 Ek taraf Avyakt dusri taraf bhavishya.  Jab pahale anubhav aap log karenge tab dusre ko bhi anubhav hoga. Jaise ek _____ chhod kar dusra liya jata hai vaise hi anubhav karenge. 

�� Light arthat halkapan bhi hota hai aur light arthat _____ bhi kaha jata hai.  Bilkul halkapan arthat light rup ho chal rahe hain, ham to ______ hain.

▪Niche diye gaye prashno mein se koi ek likhen. .... *(20 marks)

 YAGYA HISTORY SE. .......

���� Khubsurat prakrutik desh Switzerland Main National.Coordinating Office kis shahar mai hai?

-   Switzerland desh mai Brahmakumaris k kitne seva sthan hai?

                    ��OR ��

AAJ POST HONE WALI STORY SE.........

���� Aaj 2.00 - 4.00 pm k beech post hone wali kahani mein se hame kya siksha milti hai? 

         MADHUBAN

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बहुत समय पहले की बात है

Dear Angels !

बहुत समय पहले की बात है किसी गाँव में मोहन नाम का एक किसान रहता था . वह बड़ा मेहनती और ईमानदार था . अपने अच्छे व्यवहार के कारण दूर -दूर तक उसे लोग उसे जानते थे और उसकी प्रशंशा करते थे . पर एक दिन जब देर शाम वह खेतों से काम कर लौट रहा था तभी रास्ते में उसने कुछ लोगों को बाते करते सुना , वे उसी के बारे में बात कर रहे थे .

मोहन अपनी प्रशंशा सुनने के लिए उन्हें बिना बताये धीरे -धीरे उनके पीछे चलने लगा , पर उसने उनकी बात सुनी तो पाया कि वे उसकी बुराई कर रहे थे , कोई कह रहा था कि , “ मोहन घमण्डी है .” , तो कोई कह रहा था कि ,” सब जानते हैं वो अच्छा होने का दिखावा करता है …”
मोहन ने इससे पहले सिर्फ अपनी प्रशंशा सुनी थी पर इस घटना का उसके दिमाग पर बहुत बुरा असर पड़ा और अब वह जब भी कुछ लोगों को बाते करते देखता तो उसे लगता वे उसकी बुराई कर रहे हैं . यहाँ तक कि अगर कोई उसकी तारीफ़ करता तो भी उसे लगता कि उसका मजाक उड़ाया जा रहा है . धीरे -धीरे सभी ये महसूस करने लगे कि मोहन बदल गया है , और उसकी पत्नी भी अपने पति के व्यवहार में आये बदलाव से दुखी रहने लगी और एक दिन उसने पूछा , “ आज -कल आप इतने परेशान क्यों रहते हैं ;कृपया मुझे इसका कारण बताइये.”
मोहन ने उदास होते हुए उस दिन की बात बता दी . पत्नी को भी समझ नहीं आया कि क्या किया जाए पर तभी उसे ध्यान आया कि पास के ही एक गाँव में एक सिद्ध महात्मा आये हुए हैं , और वो बोली , “ स्वामी , मुझे पता चला है कि पड़ोस के गाँव में एक पहुंचे हुए संत आये हैं ।चलिये हम उनसे कोई समाधान पूछते हैं .”
अगले दिन वे महात्मा जी के शिविर में पहुंचे .
मोहन ने सारी घटना बतायी और बोला , महाराज उस दिन के बाद से सभी मेरी बुराई और झूठी प्रशंशा करते हैं , कृपया मुझे बताइये कि मैं वापस अपनी साख कैसे बना सकता हूँ ! !”
महात्मा मोहन कि समस्या समझ चुके थे .
“ पुत्र तुम अपनी पत्नी को घर छोड़ आओ और आज रात मेरे शिविर में ठहरो .”, महात्मा कुछ सोचते हुए बोले .
मोहन ने ऐसा ही किया , पर जब रात में सोने का समय हुआ तो अचानक ही मेढ़कों के टर्र -टर्र की आवाज आने लगी .
मोहन बोला , “ ये क्या महाराज यहाँ इतना कोलाहल क्यों है ?”
“पुत्र , पीछे एक तालाब है , रात के वक़्त उसमे मौजूद मेढक अपना राग अलापने लगते हैं !!!”
“पर ऐसे में तो कोई यहाँ सो नहीं सकता ??,” मोहान ने चिंता जताई।
“हाँ बेटा , पर तुम ही बताओ हम क्या कर सकते हैं , हो सके तो तुम हमारी मदद करो “, महात्मा जी बोले .
मोहन बोला , “ ठीक है महाराज , इतना शोर सुनके लगता है इन मेढकों की संख्या हज़ारों में होगी , मैं कल ही गांव से पचास -साठ मजदूरों को लेकर आता हूँ और इन्हे पकड़ कर दूर नदी में छोड़ आता हूँ .”
और अगले दिन मोहन सुबह -सुबह मजदूरों के साथ वहाँ पंहुचा , महात्मा जी  भी  वहीँ खड़े सब कुछ देख रहे थे .
तालाब जयादा बड़ा नहीं था , 8-10 मजदूरों ने चारों और से जाल डाला और मेढ़कों को पकड़ने लगे …थोड़ी देर की ही मेहनत में सारे मेढक पकड़ लिए गए.
जब मोहन ने देखा कि कुल मिला कर 50-60 ही मेढक पकडे गए हैं तब उसने माहत्मा जी से पूछा , “ महाराज , कल रात तो इसमें हज़ारों मेढक थे , भला आज वे सब कहाँ चले गए , यहाँ तो बस मुट्ठी भर मेढक ही बचे हैं .”
महात्मा जी गम्भीर होते हुए बोले , “ कोई मेढक कहीं नहीं गया , तुमने कल इन्ही मेढ़कों की आवाज सुनी थी , ये मुट्ठी भर मेढक ही इतना शोर कर रहे थे कि तुम्हे लगा हज़ारों मेढक टर्र -टर्र कर रहे हों . पुत्र, इसी प्रकार जब तुमने कुछ लोगों को अपनी बुराई करते सुना तो  भी  तुम यही गलती कर बैठे , तुम्हे लगा कि हर कोई तुम्हारी बुराई करता है पर सच्चाई ये है कि बुराई करने वाले लोग मुठ्ठी भर मेढक के सामान ही थे. इसलिए अगली बार किसी को अपनी बुराई करते सुनना तो इतना याद रखना कि हो सकता है ये कुछ ही लोग हों जो ऐसा कर रहे हों , और इस बात को भी समझना कि भले तुम कितने ही अच्छे क्यों न हो ऐसे कुछ लोग होंगे ही होंगे जो तुम्हारी बुराई करेंगे।”
अब मोहन को अपनी गलती का अहसास हो चुका था , वह पुनः पुराना वाला मोहन बन चुका था.
Friends, मोहन की तरह हमें भी कुछ लोगों के  व्यवहार को हर किसी का व्यवहार नहीं समझ लेना चाहिए और positive frame of mind  से अपनी ज़िन्दगी जीनी चाहिए। हम कुछ भी कर लें पर life में कभी ना कभी ऐसी समस्या आ ही जाती है जो रात के अँधेरे में ऐसी लगती है मानो हज़ारों मेढक कान में टर्र-टर्र कर रहे हों। पर जब दिन के उजाले में हम उसका समाधान करने का प्रयास करते हैं तो वही समस्या छोटी लगने लगती है. इसलिए हमें ऐसी situations में घबराने की बजाये उसका solution खोजने का प्रयास करना चाहिए और कभी मुट्ठी भर मेढकों से घबराना नहीं चाहिए.
                   Madhuban

मन्सा सेवा के विशेष अनुभवी बनो


      मन्सा सेवा के विशेष अनुभवी बनो
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मन्सा सेवा के लिए बापदादा की प्रेरणायें
वर्तमान समय को तो देख ही रहे हो, दिन प्रतिदिन चारों ओर मनुष्य आत्माओं में निराशा बहुत बढ़ रही है। चाहे मन्सा सेवा करो, चाहे वाचा करो, चाहे सम्बन्ध सम्पर्क की करो, लेकिन बापदादा निराश मनुष्यों के अन्दर आशा का दीप जगाने चाहते हैं। यह आशा के दीपको की दीवाली बापदादा देखने चाहते हैं।
  विश्व की आत्माओं को वर्सा दिलाना,दुःख से छुड़ाना, उसके लिए अपनी सम्पन्न स्थिति में रह मन्सा सेवा करनी है।जब मन्सा द्वारा चारों ओर शक्तिशाली किरणे फैलायेंगे तब विश्व का कल्याण होगा। जितना मन्सा सेवा में बिज़ी रहेंगे उतना समस्याओं से मुक्त हो जायेंगे, क्योंकि मन बुद्धि बिज़ी रहेगा, फ्री नहीं तो माया आएगी कहाँ, वापस चली जायेगी।
अब सेकण्ड में ज्वालामुखी स्वरूप में स्थित हो शक्तियों की किरणें फैलाओ। हे मेरे मास्टर विश्व रक्षक, शिव शक्तियाँ! सदैव मन्सा सेवा द्वारा सर्व आत्माओं को शक्ति दे सुख का, शान्ति का अनुभव कराओ।
अब प्राब्लम का दरवाज़ा बन्द करो। डबल लॉक लगाओ। डबल लॉक है- याद और सेवा सदा हाज़िर है, ऐसे नहीं चाँस ही नहीं दिया, मन्सा के लिए कोई नहीं रोकता। रात को भी जाग करके कर सकते हो, मन्सा द्वारा सकाश दो, आत्माओं का आह्वान करो, बिचारी दुःखी आत्मायें हैं, सहारा दो।

       ॐ शांन्ति 

सबसे बड़ा गुरू


Divine Angel,

सबसे बड़ा गुरू

गुरु द्रोणाचार्य, पाण्डवोँ और कौरवोँ के गुरु थे, उन्हेँ धनुर्विद्या का ज्ञान देते थे।

एक दिन एकलव्य जो कि एक गरीब शुद्र परिवार से थे. द्रोणाचार्य के पास गये और बोले कि गुरुदेव मुझे भी धनुर्विद्या का ज्ञान प्राप्त करना है आपसे अनुरोध है कि मुझे भी आपका शिष्य बनाकर धनुर्विद्या का ज्ञान प्रदान करेँ।

किन्तु द्रोणाचार्य नेँ एकलव्य को अपनी विवशता बतायी और कहा कि वे किसी और गुरु से शिक्षा प्राप्त कर लें।

यह सुनकर एकलव्य वहाँ से चले गये।

इस घटना के बहुत दिनों बाद अर्जुन और द्रोणाचार्य शिकार के लिये जंगल की ओर गये। उनके साथ एक कुत्ता भी गया हुआ था। कुत्ता अचानक से दौड़ते हुय एक जगह पर जाकर भौँकनेँ लगा, वह काफी देर तक भोंकता रहा और फिर अचानक ही भौँकना बँद कर दिया। अर्जुन और गुरुदेव को यह कुछ अजीब लगा और वे उस स्थान की और बढ़ गए जहाँ से कुत्ते के भौंकने की आवाज़ आ रही थी।

उन्होनेँ वहाँ जाकर जो देखा वो एक अविश्वसनीय घटना थी। किसी ने कुत्ते को बिना चोट पहुंचाए उसका मुँह तीरोँ के माध्यम से बंद कर दिया था और वह चाह कर भी नहीं भौंक सकता था। ये देखकर द्रोणाचार्य चौँक गये और सोचनेँ लगे कि इतनी कुशलता से तीर चलाने का ज्ञान तो मैनेँ मेरे प्रिय शिष्य अर्जुन को भी नहीं दिया है और न ही ऐसे भेदनेँ वाला ज्ञान मेरे आलावा यहाँ कोई जानता है…. तो फिर ऐसी अविश्वसनीय घटना घटी कैसे?

तभी सामनेँ से एकलव्य अपनेँ हाथ मेँ तीर-कमान पकड़े आ रहा था।

ये देखकर तो गुरुदेव और भी चौँक गये।

द्रोणाचार्य नेँ एकलव्य से पुछा ,” बेटा तुमनेँ ये सब कैसे कर दिखाया।”

तब एकलव्य नेँ कहा , ” गुरूदेव मैनेँ यहाँ आपकी मूर्ती बनाई है और रोज इसकी वंदना करने के पश्चात मैं इसके समकक्ष कड़ा अभ्यास किया करता हूँ और इसी अभ्यास के चलते मैँ आज आपके सामनेँ धनुष पकड़नेँ के लायक बना हूँ।

गुरुदेव ने कहा , ” तुम धन्य हो ! तुम्हारे अभ्यास ने ही तुम्हेँ इतना श्रेष्ट धनुर्धर बनाया है और आज मैँ समझ गया कि अभ्यास ही सबसे बड़ा गुरू है।”

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अगर ब्राह्मण जीवन की बनी हुई दिनचर्या.........


   अमृत वेले का महत्व

अपनी अवस्था को check  करो

अगर ब्राह्मण जीवन की बनी हुई दिनचर्या प्रमाण कोई भी कर्म यथार्थ वा निरंतर नही करते,तो उसके अंतर के कारण पूजा में भी अंतर पड़ता है ।मानो कोई अमृत वेले उठने की दिनचर्या में विधिपूर्वक नही चलते तो पूजा में भी उनके पुजारी भी उस विधि में ऊपर नीचे करते। अर्थात पुजारी भी समय पर उठ कर पूजा नही करेगा,जब आया तब कर लेगा।

अमृत वेले जागृत स्तिथि में अनुभव नही करते ,मजबूरी से वा कभी सुस्ती,कभी चुस्ती के रूप में बैठते,तो पुजारी भी मज़बूरी से या सुस्ती से पूजा करेंगे,विधिपूर्वक पूजा नही  करेंगे।

ऐसे हर दिनचर्या के कर्म का प्रभाव पूजनीय बनने में पड़ता है ।विधिपूर्वक ना  चलना ,कोई भी दिनचर्या में ऊपर नीचे होना -यह भी अपवित्रता के अंश में गिनती में होता है।

बाहर का रूप देख घबराने से अच्छी सोच........



वाह ड्रामा वाह

ड्रामा न्यायकारी,कल्याणकारी वा एक्यूरेट है।

बाहर का रूप देख घबराने से अच्छी सोच बदल जाती,कर्म बन्धन में फंस जाते।

छोटी बात को बड़ी बनाना अर्थात परेशान होना वा अधिकारीपन की शान में रहना,यह अपनी स्तिथि के ऊपर आधार रखता है।क्या हो गया???या जो हुआ  वो अच्छा हुआ यह सोचना अपने ऊपर है।यह निश्च्य बुरे को भी अच्छे में बदल सकता है

क्योकि हिसाब~किताब चुक्तू होने के कारण वा ड्रामा अनुसार समय प्रति समय practical paper होने के कारण कई बातें अच्छे रूप में सामने आएंगी और कई बातों का बाहर का रूप नुकसान का भी होगा।

लेकिन नुक्सान के पर्दे के अंदर जो फायदा छिपा होता है अगर थोडा सा धैर्यवत अवस्था वा सहनशील स्तिथि से अंतर्मुखी हो कर देखें तो बाहर के पर्दे के अंदर जो फायदा छिपा है वही आपको दिखाई देगा।इसलिए ऊपर अर्थात बाहर के रूप को देखते हुए भी नही देखो।

बाहर के रूप को देख जल्दी घबरा जाते हो जिस कारण अच्छा सोचा हुआ भी बदल जाता है और कर्म बन्धन में फंसते हो।क्यों क्या?कैसे हो गया???मेरा ही भाग्य ऐसा था???ये रस्सियाँ बांधते जाते हो।ऐसे व्यर्थ संकल्प ही कर्म बंधन की सूक्ष्म रस्सियां हैं।



यह हर जन्म के संस्कारों का recordभरने का समय अभी है।......



वाह ड्रामा वाह

ड्रामा न्यायकारी,कल्याणकारी वा एक्यूरेट है।
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यह हर जन्म के संस्कारों का recordभरने का समय अभी है। आत्मा में हर जन्म के संस्कारों का record इस समय भर रहे हो तो record भरने के समय second-2 का attention रखा जाता है।किसी भी प्रकार के tension का attention अर्थात tension में भी attention रहे। अगर किसी भी प्रकार का tension होता है तो record ठीक नही भर सकेगा।

सदा काल के लिए श्रेष्ठ नाम की बजाए यह गायन होता रहेगा कि जितना अच्छा भरना चाहिए उतना नही भरा है। इसलिए सब प्रकार के tension से परे स्वयं और समय का,बाप के साथ काattention रखते हुए second-2 का part बजाओ।मास्टर सर्व शक्तिमान,all mighty authority की संतान ऐसी knowledge full आत्माओं में tension का आधार दो शब्द हैं ।

कौन से दो शब्द????क्या और क्यों।किसी भी बात में यह क्या हुआ??यह क्यों हुआ???जब ये दो शब्द बुद्धि में आ जाते है तब किसी भी प्रकार का tension पैदा होता है। लेकिन संगम युगी श्रेष्ठ पार्ट धारी आत्माएं क्यों,क्या का tension नही रख सकती हैं,क्योकि सब जानते है कि साक्षी और साथीपन कीविशेषता,ड्रामा के हर पार्ट को बजाते हुए ,संस्कारों का record नम्बर वन stage में भरते जाओ।

 यदि जरा भी संकल्प में tension हुआ अर्थात attention कम हुआ तो फुल पास नही होंगें। इसलिए अचल होना है।
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आत्म अनुभूति ही जीवन का सच्चा विश्राम है।

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��श्वेत व् शांत जीवन के महावाक्य��

 आत्म अनुभूति ही जीवन का सच्चा विश्राम है।

 सर्व से कल्याण की भावना रखने से दृष्टि और वृत्ति दोनों बदल जाते है।

 आत्मा का परमात्मा से मिलन ही सर्वश्रेस्ठ मिलन है।

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दीपराज बाबा ने मनाई दीपावाली

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          ♻बाबा पोयम्स♻

दीपराज बाबा ने मनाई दीपावाली

चैतन्य दीपकों से अपनी सभा सजाई

हर आत्मा की जागती ज्योत हुई उजयारी

प्रकाश से विश्व को मिली खुशहाली

आत्मा दीपकों से दिवाली की यादगार मानाई

दिव्य स्वरुप से हर आत्मा चमकाई

सादहरण रूप नही दिया फिर दिखाई

प्रज्वलित हुआ हर दीप फिर आत्मा जगमगाई

वाह वाह चैतन्य दीपक के गीत गुनगुनाओ

दीपराज संग अपनी दीपावली मनाओ

खुशियों के इन पलो को दिल में बसाओ

अपने दीपक की ज्योति से हर दीप जगाओ

इस ज्वाला से विश्व का नया रूप दिखाओ

बापदादा की दी मुबारकों से मुस्कराओ

वाह बाबा वाह.. वाह दीपराज के दीपकों अपनी ही यादगार को दिल से मानाओ।।

ॐ शांति !!!

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याद की यात्रा का करो तुम स्नान

उससे ही होगा आत्मा का कल्याण

जन्म जन्मान्तर के होंगे सब पाप भस्म

आत्मा बन जायेगी फिर सत्तोप्रधान

ज्ञान है पढ़ाई करनी इससे सच्ची कमाई

होती नही इससे पापों की भरपाई

ज्ञान है सहज याद में होती मेहनत

याद से ही बनते पुण्य आत्मा

याद के बल से ही ज्ञान का तीर लगता

आत्मा का बुझता हुआ दीपक फिर जलता

बुद्धि स्वच्छ हो करती अच्छी धारणा

निरंतर याद हो तो बन जाये कर्मातीत

मुश्किल से 5 मिनट कोई की याद ठहरती

माया के विघ्न से बुद्धि फिर भटकती

चढ़ती कला से उतरती कला हो जाती

देह-भान से बुद्धि फिर मलीन हो जाती

अहंकार में लाकर माया नीचे जोड़ पटकती

आत्मभिमानी होने का अभ्यास करना

देह को भूल सिर्फ एक बाप को याद करना

मन्मनाभव के मन्त्र से सुरजीत हो जाना

अचल अडोल हो अंगद जैसा बनना

संगठन में सहयोग की अंगुली देना

नये ज्ञान से नयी दुनिया को लाना

पावन बन याद से पावन देवता बनना

याद के जोहर से ज्ञान की पराकाष्ठा पाना

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