Wednesday, July 15, 2015

अगर हम हर व्यक्ति के अवगुणों की बजाए उसके गुणों पर ही दृष्टि डालें तो........

गुण दर्शन से हमारे मन में भी गुण मूर्त संस्कार बन जायेंगे और जीवन प्रसनन्नता से भरपूर हो जाएगा.......

एक मनुष्य का दूसरे मनुष्य से टकराव तभी पैदा होता है जब उसकी दृष्टि दूसरों के अवगुणों पर जाती है।अवगुण देखने से उसके मन में उस मनुष्य के प्रति घृणा के भाव जागृत होते हैं।अत:सम्बन्धो को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक है कि हम एक दूसरे में गुणों को देखें।और परस्पर गुणों का ही वर्णन करें।

हमे इस बात को बुद्धि में अच्छी रीति बिठा लेना चाहिए कि वर्तमान समय सभी की तमोप्रधान अवस्था है।अत:अवगुण तो सभी में भरे पड़े है।किसी में कोई अवगुण है तो किसी में कोई।अत: यह जानते हुए कि आज हर एक मानव अवगुणों से भरपूर है तो बार बार उन अवगुणों चिंतन करने या उनका वर्णन करने का क्या फायदा???

और फिर यह तो लॉ है कि मनुष्य जैसा चिंतन करता है वैसा ही वह स्वयं बन जाता है। तो क्या हमे दूसरों के अवगुणों का चिंतन करके स्वयं को भी उन्ही अवगुणों से सम्पन्न बनाना है????क्या स्वयं हममें पहले से ही अवगुण कम हैं??महानता तो इसमें है कि हम एक दूसरे अवगुणों का वर्णन करने करने की बजाए प्रेम पूर्ण व्यवहार एक दूसरे के अवगुणों को निकाले।

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