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बापदादा ने पहले ख़ज़ाने के 3 खाते जमा करो यह पहले बताया है। तो क्या देखा 3 खाते कौनसे है वह तो याद होगा ना। फिर भी रेवाइस कर रहे है। एक है अपने पुरषार्थ से जमा का खाता बढ़ाना दूसरा है सदा स्वयं भी सन्तुष्ट रहे और दूसरे को भी संतुष्ट करे। विभिन्न संस्कार को जानते हुए भी संतुष्ट रहे और करे इससे दुआओ का खता जमा होता है। अगर किसी भी कारण से संतूष्ठ करने में कमी रह जाती है तो पुण्य के खाते में जमा नहीं होता। संतुष्ट पुण्य की चाबी है और तीसरा हैं सेवा में भी सदा निस्वार्थ, मैं पैन नहीं। मैंने किया या मेरा होना चाहिए यह मैं और मेरापन जहा सेवा में आ जाता है वहा पुण्य का खाता जमा नहीं होता। मेरापन के अनुभवी हो रॉयल रूप का भी मेरापन बोहोत है। रॉयल रूप का मेरापन साधारण मेरापन से लंबी है। जहा मैं और मेरेपन का स्वार्थ आ जाता है निस्वार्थ नहीं वह पुण्य का खाता कम हो जाता है। मेरा पन की लिस्ट कभी सुनाएंगे बड़ी लंबी है और सूक्ष्म है। बापदादा ने देखा अपने पुरषार्थ से यथाशक्ति सभी अपना अपना खाता जमाँ कर रहे है। लेकिन दुआओ का खाता और पुण्य का खता वह अभी बढ़ने की आवश्यकता है इसलिए तीनो जमा करने का अटेंशन संस्कार वैरायटी अभी भी दिखाई देंगे सबके संस्कार। अभी सम्पन्न नहि हुए है लेकिन हम हमारे ऊपर औरो के कमज़ोर स्वाभाव कमज़ोर संस्कारो का प्रभाव नहीं पढ़ना चाहिए। मैं मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ कमज़ोर संस्कार शक्तिशाली नहीं है। मास्टर सर्वशक्तिवान के उपर कमज़ोर संकल्पों का प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। सेफ्टी का साधन है बापदादा के छत्र
छत्रछाया में रहना बापदादा से कंबाइंड रहना। छत्रचाया है श्रीमत। 31.3.07
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