Friday, January 30, 2015

प्रश्न अपने को संगमयुगी ब्राह्मण क्यों समझना चाहिए ?

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��15/01/2015��

��आज की मुरली का revision��

��  प्रश्न  अपने को संगमयुगी ब्राह्मण क्यों समझना चाहिए ?
उत्तर  1 सतयुगी झाड़ देखने में आयेंगें।
         2 अपार ख़ुशी में रहेंगे
         3 हमारा बेड़ा पार हो जाएगा ।

��  प्रश्न  कौन सी चीज़ इस सृष्टि चक्र पर सदा कायम रहती है?
उत्तर  केवल शिवबाबा ही इस सृष्टि चक्र में सदा कायम रहते हैं ।

��  प्रश्न  विचार सागर मंथन किसे कहते हैं ?
उत्तर  संगम पर जो हम नई नई बातें सुनते है उसका चिंतन जब बुद्धि में चलता है और ज्ञान रत्न के रूप में मुख से निकलता है -- उसे विचार सागर मंथन कहते है ।

��  प्रश्न  कौन बच्चे स्वर्गवासी बनेंगे?
उत्तर  संगमयुगी बच्चे ही स्वर्गवासी बनेंगें ।

��  प्रश्न  बाबा ने मुर्दे किसे कहा है ?
उत्तर  जो बच्चे कामचिता पर बैठ कर विकारों की आग में जल रहे हैं बाबा ने उनको मुर्दे कहा है ।

��  प्रश्न  अत्तिन्द्रिय सुख की भासना किसे आती है ?
उत्तर  गोप गोपियों को  -- जो बाबा के बच्चे प्रतिदिन आनंद में रहते , ज्ञान और योग की शिक्षा ले रहे हैं।
��  प्रश्न  ईश्वरीय मिशन कौन हैं ?
उत्तर  ईश्वरीय मिशन हम बच्चे हैं , जो औरों को शूद्र से ब्राह्मण , ब्राह्मण से देवता बनाते हैं ।

��  प्रश्न  मुखवंशावाली ब्राह्मणों का मुख्य लक्षण क्या है ?
उत्तर  मुख वंशावली ब्राह्मण मनसा वाचा कर्मणा पवित्र होते हैं । कोई भी अपवित्र कर्तव्य नहीं करते हैं परंतु ऐसी अवस्था जमाने में टाइम तो लगता है ।

��  प्रश्न  बच्चों को सजाएँ क्यों खानी पड़ती हैं ?
उत्तर  कोई भी ऐसा कर्म जो श्रीमत के अनुसार नहीं है अगर बच्चे करते हैं तो सजाएँ खानी पड़ती हैं । सज़ा खाने से हिसाब किताब चुक्तू हो जाता है ।

��  प्रश्न  हमारा युद्ध किसके साथ है?
उत्तर  हम बच्चों का युद्ध माया अर्थात् 5 विकारों के साथ है ।यह युद्ध सबसे अधिक टाइम चलता है ।कुछ बच्चे माया से युद्ध में हार जाते हैं और मर जाते हैं अर्थात ज्ञान में नहीं चल पाते ।

��  प्रश्न  बाबा से हमारे मुख्य 3 सम्बन्ध कौन से हैं ?
उत्तर  1 सुप्रीम बाप
          2 सुप्रीम टीचर
           3 सतगुरु

��  प्रश्न  कौन से बच्चे बहुत अधिक ख़ुशी में रहते हैं ?
उत्तर  महारथी बच्चे जिन्हें दूसरों के कल्याण का शौक रहता है , प्रदर्शनी आदि में सर्विस करते हैं -- ऐसे बच्चे बहुत ख़ुशी में रहते हैं ।

��  प्रश्न  आज की मुरली में बाबा ने हम बच्चों को क्या क्या टाइटल दिए हैं?
उत्तर  1 ऑन गॉड fatherly सर्विस
          2 स्वदर्शन चक्र धारी
           3 चैतन्य लाइट हाउस

��  प्रश्न  गीता का भगवान कौन है ?
उत्तर  गीता का भगवान पतित पावन बाप , ज्ञान का सागर है । वहीँ ज्ञान और योग बल से विश्व परिवर्तन का कार्य कराते हैं ।

��  प्रश्न  हम बच्चों की सच्ची सच्ची माँ कौन है ?
उत्तर  ब्रह्मा बाबा क्योंकि सबसे पहले शिवबाबा इनमे प्रवेश करके हम आत्माओं को अपना बच्चा बनाते हैं ।

��  प्रश्न  बच्चों को याद की यात्रा difficult क्यों लगती है ?
उत्तर  क्योंकि ये बॉक्सिंग है माया और ईश्वर के बच्चों की । जब बच्चे माया से हार जाते हैं तो बाबा की याद बुद्धि से भूल जाती है ।

��  प्रश्न  अब हम बच्चों की aim क्या है ?
उत्तर  माया पर जीत पाकर कर्मातीत अवस्था में जाना और नई पवित्र दुनिया के मालिक बनना ।

प्रश्न   आज की मुरली में बाबा ने क्या क्या revise कराया  ??

उत्तर   1     हम बच्चे ईश्वरीय मिशन के हैं  ।

2  हम ऑन गॉड फादर्ली सर्विस पर हैं।
3  मनमना भव ।

4  आदि मध्य अन्त की नाॅलेज ।

5   स्वदर्शन चक्रधारी

6   चैतन्य लाइट हाउस ।

7   गीता का भगवान ज्ञान का  सागर पतित पावन है वही ज्ञानबल और  योगबल से कार्य कराते हैं।

8    भारत का प्राचीन योग मशहूर है ।
जो हम अब सीखते हैं।

9     सब का बाप एक है उस के दिए गए ज्ञान से हम जन्म लेते हैं ।

�� सच्ची सच्ची मदर ब्रह्मपुत्रा है।

��पहले पहले सागर और ब्रह्मपुत्रा इनका संगम होता है।

��मामेकम् याद करो  तो विक्रम विनाश होंगे ।

��पहले पहले अपने को आत्मा समझो
फिर आत्मओं का पिता परमात्मा है।

��यह बॉक्सिंग है माया और ईश्वर के बच्चो की।

��माया पर जीत पा कर कर्मातीत अवस्था को पाना है ।

��सतयुग में कर्म सम्बन्ध था। आत्मा पवित्र थी ।

��अब कर्मबंधन है ।पुरानी दुनिया में पतित हो पड़े है ।

��प्रश्न   सारा दिन किन बातों का मंथन चलना चाहिए ?
उत्तर   मुरली पढ़ कर ज्ञान के शौकीनों को एकांत में बैठ कर मनन चिन्तन करना चाहिए ।

��प्रश्न   सबको क्या समझ कर ज्ञान देना चाहिए ।
उत्तर  किसी को किसी धर्म का ना समझ कर आत्मा समझ कर ज्ञान देना चाहिये ।आत्मा आत्मा
भाई भाई है सारे ।  आत्मा की प्रैक्टिस डालो ।नाम रूप देह सब  भूल जाए ।

�� प्रश्न   बाबा ने कौन सी हिम्मत दिलाई है ?
उत्तर  अगर माया से हारते हो।तो फिर उठकर खड़े हो जाओ ।

��प्रश्न  हमें क्या फखुर होना चाहिये ???
उत्तर   बाप आकर हम बच्चों को आपे ही पढ़ाते हैं।

�� प्रश्न   अव्यभिचारी याद क्या है ???
उत्तर   एक बाप को ही याद करना अव्यभिचारी याद है ।

��गीता  ,अमरनाथ की कथा और सत्य नारायण की कथा एक है। गीता से ही हम नर से नारायण बनते हैं ।

�� सिर्फ एक शिव बाबा ही कायम है।

��आत्मा के पंख टूट गये हैं ।इसलिए वो उड़ नहीं पाती ।अब बाबा ने आकर ज्ञान और योग के पंख दिए हैं ।

��बाबा कहते हैं योगबल से तुम्हारे पाप भस्म होंगे। पुण्य आत्मा बन जाओगे ।इसलिए मामेकम् याद करो ।

��वरदान  : -

  जो बाप के प्यार में लवलीन रहते हैं ।जो उनके प्यार में खोये रहते हैं। उनके लिए बाबा का प्यार मायाप्रूफ़  बन जाता है। न वो माया की तरफ आकर्षित होते हैं। न अल्पकाल के किसी आकर्षण में वो फँसते हैं।
जैसे मीरा श्री कृष्ण के प्रेम की दीवानी थी ।तो कोई माया उसे अपनी तरफ खींच नहीं पाई । वा दी जाने वाली हर तकलीफ उसके लिए वरदान बन गई ।

��प्रश्न    कौन से दो तरह के चार्ट देने चाहिये ?
उत्तर    एक याद का चार्ट ।
          एक सर्विस का चार्ट ।

��स्लोगन  : - न्यारे प्यारे होकर कर्म करने वाला ही सेकण्ड में फुलस्टॉप लगा सकता है ।
अर्थात् जो ज्यादा झमेलों में नहीं पड़ता उसके पास परेशानियों का स्टोक कम होता है ।इसलिए जल्दी ही वो सार में स्थित हो जाता है ।

       �� ओम् शान्ति��

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