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Mera baba
आज का स्वमान
मैं आत्मा अविनाशी ज्ञान रत्नों का धंधा कर 21 जन्मों के लिए पदमापदम
भाग्यशाली बनने वाली आत्मा हूँ।
दुनिया में जीने के लिए सभी मनुष्य कोई ना कोई धंधा अवश्य करते हैं।भले ही कोई का धंधा रॉयल होता है तो कोई का छी-छी धंधा भी होता है।लेकिन इस विनाशी दुनिया में मनुष्य जो भी धंधा आदि करते हैं उनसे होने वाली प्राप्ति भी विनाशी ही होती है।
क्योकि यह है ही आसुरी दुनिया।और आसुरी दुनिया में किया जाने वाला हर धंधा आसुरी मत पर ही आधारित होता है।तो रावण की मत पर चल कर किये गए किसी भी धंधे में श्रेष्ठ प्राप्ति कैसे हो सकती है????~
श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ प्राप्ति तो सिर्फ एक ही धंधे में हो सकती है और वह धंधा है अविनाशी ज्ञान रत्नों का धंधा,जो इस समय संगम युग पर स्वयं परम पिता परमात्मा शिव बाबा ब्रह्ना मुख द्वारा हम ब्राह्मण को देते हैं।दुनिया के धंधे तो विकारों की उत्तपत्ति कर ओर ही मनुष्यों को पतन की और ले जाते हैं।
लेकिन परम् पिता परमात्मा से प्राप्त अविनाशी ज्ञान रत्नों का यह धंधा विकारो से छुडाए दैवी गुणों से भरपूर बनाने वाला है।21 जन्मों के लिए अपरम अपार सुखो से सम्पन्न बनाने वाला है।
तो सोचो कितने पदमा पदम भाग्यशाली हैं हम ब्राह्मण बच्चे जो हर कदम के साथ पदम् की कमाई जमा करते हैं।बाप से मिले अविनाशी ज्ञान रत्नों को धारण कर जब औरों को कराते हैं तो इस धंधे से 21 जन्मों के लिए विश्व महाराजन बन पूरे विश्व पर राज्य करते हैं।
Omshanti
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