Mera Baba
आज का स्वमान
मैं राजयोग की पढ़ाई पढ़ माया से जीतने वाली सदा विजयी आत्मा हूँ।
✨राजयोग माना परम पिता परमात्मा से योग लगा कर राजाई प्राप्त करना।मनुष्य जो लौकिक पढ़ाई पढ़ते हैं वह तो विनाशी उंच पद की प्राप्ति करवाने वाली है क्योकि वह पढ़ाई पढ़ाने वाले भी इसी विनाशी दुनिया में रहने वाले नशवर देहधारी मनुष्य ही हैं।
किन्तु राजयोग की पढाई पढ़ाने वाला कोई साधारण मनुष्य नही बल्कि स्वयं निराकार ज्योति बिंदु परम पिता पर्मात्मा शिव बाबा हैं।
जो ऊँचे ते ऊँचे धाम परमधाम से ,ऊंच राजाई पद की प्राप्ति करवाने वाली ऊँची ते ऊँची राजयोग की पढ़ाई पढ़ाने के लिये आते हैं।
और यह भी हर मनुष्य का व्यक्तिगत अनुभव है कि जितनी ऊंच और श्रेष्ठ प्राप्ति,उतने ही ज्यादा विघ्न।और क्योकि राजयोग की पढ़ाई अविनाशी ऊँच ते ऊँच पद की प्राप्ति करवाने वाली है।इसलिए सबसे ज्यादा विघ्न अर्थात माया के तूफ़ान भी राजयोग की पढ़ाई द्वारा राजाई प्राप्त करने वाले हम ब्राह्मण बच्चों के सामने ही ज्यादा आते हैं।
लेकिन माया के तुफानो से बचने और माया पर विजय प्राप्त करने का मुख़्य आधार भी राजयोग ही है। अपने वास्तविक आत्मिक स्वरूप् में टिक कर आत्मा जब परमात्मा के साथ योग लगाती है।तो आत्मा में बल भरता है।
✨परमात्मा की याद से आत्मा पर चडी 63 जनमो के विकारो की कट उतरती है और आत्मा पावनं बनती है
और निरन्तर सर्वशक्तिवान बाप क़ी छत्रछाया में रह कर सर्वशक्तियो द्वारा माया पर विजय प्राप्त करती है।
Omshanti
No comments:
Post a Comment