Sunday, November 30, 2014

योगी बनना ही सेवा करना है

29th November 2014

♥ Samadhan ♥

" योगी बनना ही सेवा करना है - B K सूरज भाई "
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♥ सार ♥ 

शिव भगवानुवाच . . . .


जो मुझे दिन में आठ घंटे याद करता है वह संसार की सबसे बड़ी सेवा करता है |

गीता में भी यह जिक्र है कि जिसके मन में संकल्पों का अभाव है वही योगी संसार के लिए कल्याणकारी है |

योग के लिए चाहिए प्लानिंग , उसमें रूचि और दृढ़ संकल्प |

यह एक Unique बात है कि इसमें साधारण लोग ही सफल होते हैं यानी जो इच्छा मातरम् अविद्या बन जाते हैं |
इच्छा किसी भी चीज़ की हो सकती है - जैसे धन , मान-शान आदि |

त्याग का भी तपस्या से बहूत गहरा सम्बन्ध है |

केवल इतना ही नहीं सूक्ष्म त्याग जैसे की अपवित्र संकल्पों का त्याग , इर्ष्या , द्वेष , अहंकार का भी त्याग करना है |

सबके लिए मन में Good Feelings रखनी हैं |


योगी का चित्त सदैव निर्मल , स्वभाव सरल और Purity एकदम Perfect होगी |

वह कभी क्या-क्यों में नहीं जाएगा |

साक्षीभाव में स्थित रहेगा |

निःस्वार्थ, निष्काम भाव से सेवा करेगा |

अगर योगी बनने के लिए उसे संसार में Achievements कम भी मिलें तो भी वह उसे भी सहज ही स्वीकार कर लेगा |

योग का सुख , प्राप्तियाँ इतनी ज़बदस्त हैं की उसका मन स्वतः इन सब कामनाओं से हट जाता है |

Om Shanti.

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