दुःख का मूल कारण क्या???
दुःख का मूल कारण एक ही शब्द है~भूलना अर्थात विस्मृति।
उदाहरणार्थ यात्रा करनी है लेकिन टिकट कहीं रख कर भूल गए।बात बतानी है लेकिन याद नही आ रही है।बाबा को याद करने बैठे है लेकिन
करते करते उन्ही को भूल जाते हैं
माया भी तभी आती है जब याद भूल जाती है।भूल से ही समस्याएं पैदा होती हैं।सब दुखो का मूल भूलना ही है।ज्ञान याद ना आया तो waistage. व्यर्थ बातें याद आती रहेंगी और leakage होती रहेगी।भूलने वाला बहुत दुखी होता है लेकिन जो जितना सम्पूर्णता के निकट आता जाएगा वो आवश्यक बाते भूलेगा नही और व्यर्थ को भूलता जाएगा।
वो अभुल बन जायेगा।वास्तव में माया हमारी निर्णय शक्ति वा समरण शक्ति को नष्ट करती है।और हम कह देते हैं पता नही उस समय क्या हो गया,जो वक्त पर बात याद ही ना आई।लेकिन जितना हम माया से निकलते जाएंगे उतना भूलना बन्द हो जाएगा।स्मृति में स्तिथ हो जाएंगे।स्मृति ही समर्थी है और विस्मृति ही असमर्थि है।
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