Sunday, November 30, 2014

आत्मा में जीवन की शक्ति और उपयोग

आत्मा में जीवन की शक्ति और उपयोग

��जीवन मुक्त हो जीवन खर्च न हो ।
��जीवन बंधा हुआ भी न हो ।
��जीवन में सच्ची सेवा समाई हुई हो
��जीवन सर्व आत्माओं के ,प्रकृति के और समय क काम की ऊर्जा है े
��जीवन की लाइट को आत्मा अपनी प्राप्तियों में परिवर्तन कर सके
��जीवन बंधन में आत्मा अपनी  लाइट और माईट का उपयोग न कर देह का उपयोग करती है
��आत्मा अपना जीवन और जीवन की शक्ति अपने अंतिम देह से अंतिम सिरे पर बिताती रहती है ��बाकि समय स्थान जन्मों को बिताहुआ समझकर खाली छोड़ देती है
��जबकि उसके पास कल्प के अंत तक अदि मध्य अंत को संभालने लाइट और माईट होती है ��अपने विस्तार और सार को न पहचानने के कारण अंत को ही या अंत में ही अपना जीवन समझती है ।
��अपनी विशालता ,गहराई ,ऊंचाई गूह्यता, महीनता, पारदर्शिता सम्पन्नता और समीपता को न पहचानने के कारण जीवन शक्ति,संकल्प शक्ति और समय को यूं ही समाप्त करते रहती है ।
����हमें याद नही रखना है और निश्चय भी रखना है :---
��हम ब्राह्मण साकार और आकारी बिश्व के न केवल निर्माता के बच्चे अर्थात निर्माता हैं बल्कि इस आँखों से दिखने वाले विश्व की की सर्व श्रेष्ठ प्राप्तियां भी हैं अपनी वैल्यू से अपने व अपनी पीड़ियों के लिए श्रेष्ठतम संसार का निर्माण ,स्थापना ,परिवर्तन,पालना और विनाश संगम पर ही कर लेना है ।
��ओम शान्ति��
��������������������

No comments:

Post a Comment