आत्मा में जीवन की शक्ति और उपयोग
जीवन मुक्त हो जीवन खर्च न हो ।
जीवन बंधा हुआ भी न हो ।
जीवन में सच्ची सेवा समाई हुई हो
जीवन सर्व आत्माओं के ,प्रकृति के और समय क काम की ऊर्जा है े
जीवन की लाइट को आत्मा अपनी प्राप्तियों में परिवर्तन कर सके
जीवन बंधन में आत्मा अपनी लाइट और माईट का उपयोग न कर देह का उपयोग करती है
आत्मा अपना जीवन और जीवन की शक्ति अपने अंतिम देह से अंतिम सिरे पर बिताती रहती है बाकि समय स्थान जन्मों को बिताहुआ समझकर खाली छोड़ देती है
जबकि उसके पास कल्प के अंत तक अदि मध्य अंत को संभालने लाइट और माईट होती है अपने विस्तार और सार को न पहचानने के कारण अंत को ही या अंत में ही अपना जीवन समझती है ।
अपनी विशालता ,गहराई ,ऊंचाई गूह्यता, महीनता, पारदर्शिता सम्पन्नता और समीपता को न पहचानने के कारण जीवन शक्ति,संकल्प शक्ति और समय को यूं ही समाप्त करते रहती है ।
हमें याद नही रखना है और निश्चय भी रखना है :---
हम ब्राह्मण साकार और आकारी बिश्व के न केवल निर्माता के बच्चे अर्थात निर्माता हैं बल्कि इस आँखों से दिखने वाले विश्व की की सर्व श्रेष्ठ प्राप्तियां भी हैं अपनी वैल्यू से अपने व अपनी पीड़ियों के लिए श्रेष्ठतम संसार का निर्माण ,स्थापना ,परिवर्तन,पालना और विनाश संगम पर ही कर लेना है ।
ओम शान्ति
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