भगवान का साथ
जो जितनी जिम्मेवारी लेता उतना ही बाप सहयोग देने का जिम्मेवार है ।जब बाप को जिम्मेवारी दे दी तो स्वयं नही उठानी चाहिए ।जिनके निमित बनते उनकी जिम्मेवारी अपनी समझते हो तो मुश्किल हो जाती है। जिम्मेवार बाप है ना की आप।अपने ऊपर बोझ तो नही रख लेते। कईयों को बोझ उठाने की आदत होती है ।कितना भी कहो फिर भी उठा लेते हैं। यह ना हो जाए,ऐसा ना हो जाए यह व्यर्थ के बोझ है। बोझ बाप के ऊपर छोड़ दो तो सफलता भी ज्यादा और तरक्की भी ज्यादा मिलेगी।
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