Sunday, November 30, 2014

कर्म करते योग कैसे करें???

कर्म करते योग कैसे करें???
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कर्म करते समय हमारी दो प्रकार की स्मृतियाँ बनी रहती है।एक है चेतन अवस्था जिसको जागृत अवस्था भी कहते हैं  दूसरी है अर्धचेतन अवस्था जिसको सुषुप्त आवस्था भी कहते हैं।जो भी हम कार्य करते हैं वह हमारे ध्यान में रहता है जिसको चेतन अवस्था कहतें हैं दूसरी अर्ध चेतन अवस्था रहती है उसमे भी कुछ बातें बनी रहती हैं।

जैसे एक आदमी दूकान पर काम करता है ।ग्राहक के साथ वह बातें भी करता रहता है और उन्हें चीजे भी दिखाता रहता है।फिर भी उसके मन में यह रहता है,मैं तो sales man हूँ। इस दूकान का मालिक तो कोई और है मैं नही हूँ चाहे यह स्मृति उसके मन में स्प्ष्ट ना भी हो लेकिन उसके अर्ध चेतन mind में तो यह रहता ही है।इसी प्रकार कार्य करते वक़्त हमे स्मृति रहे कि हम निमित हैं,ट्रस्टी हैं परमात्मा के instrument हैं।

��निमित हो कर इस शरीर से कार्य कर रहे हैं अगर यह स्मृति सूक्ष्म रूप में भी बनी रहती है तो हमारा योग साथ साथ बना रहता है इसके लिए जरूरी है कि हर घण्टे में, 2 घण्टे में 1 मिनट के लिए एकांत में बैठ कर अपनी स्मृति को पुन:स्मरण करें कि मैं आत्मा हूँ ,मैं ज्योति स्वरूप् हूँ,मैं लाइट माइट हूँ,अनादि और अविनाशी हूँ।

यह अभ्यास हम बार -बार करते हैं तो कुछ समय के बाद कर्म करते हुए भी यह भावना स्वाभाविक हो जाती है कि मैं आत्मा हूँ मैं निमित हूँ भगवान् का instrument हूँ।इसको कहेंगे योग की अवस्था।
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